USKA DIKHNA — MATLAB MAUT PAKKI!! | Aapbeeti 29 | 2 Real Horror Stories From India | Ep 93
SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast
This episode of Spookcast features two chilling listener-submitted horror stories from India. The first recounts a 2011 encounter with spect
Key takeaways
- Deepak Kumar witnessed two weightless, white-clad figures hovering near a Gular tree in Unnao.
- The Gular tree's branches were unnaturally low, resembling an old man peering down at the ground.
Main topics
- Unnao Gular Tree Mystery
- Lohardaga Family Tragedy
Notable quotes
जब तक कि वो खुद किसी को अपने साथ ना ले जाना चाहें तो हूँ किस्मत वाला है जो तुझे कुछ नहीं हुआ
Conclusion
The episode serves as a haunting exploration of how historical violenc
Transcript preview
Speaker 3 (0:06) मैं Speaker 2 (0:10) हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पूक कास्ट Speaker 2 (0:20) दोस्तों नमस्कार मैं हूँ मंजिला और वेलकुम बार टू अ न्यू एपिसोड आप बीती बाई स्पूक कास्ट जहां मैं सुनाते हूँ कुछ ऐसी सची डरावनी घटनाएं जो स्पूक कास्ट लिस्नर्स ने मेरे साथ शेकी हैं आज के इस आप बीती एपिसोड में मैं तो सच में होती हैं क्योंकि इन दोनों हाथसों का दूर दूर तक कोई लॉजिकल एक्स्पेनेशन नहीं है ना मेरे पास ना ही जिनों ने इन्हें भीजा है उनके पास पहली घटना हमें ले जाती है उत्तर प्रदेश की उन्नाव जिले के एक सुनसान गाउ में जहां गर्मियों क Speaker 2 (1:16) जिसे वो आज तक नहीं भूल पाया और आज की दूसरी घटना हमें ले जाती है ज्हालकंड के लोहार दागा में जहां एक पुष्टैनी घर के कमपाउंड की मिट्टी में दफन एक सदियो पुराने खौफना का दीत ने एक एक करके परिवार की साथ लोगों को निकल लिया So Speaker 2 (1:47) आज की पहली घटना मुझे भीजी है दिल्ली से धीपक कुमार ने। ये बात साल 2011 की है जब वो उत्तर प्रदेश की उन नाव जिले में स्थित अपने गाउं भटोली गए हुए थे। वहां के बुजुर्गों की कही एक पुरानी छीतावनी को उन्होंने शुरुवात में ब चलिए इस घटा को अब मैं दीपक के शब्दों में आपके सामने रखने की कोशिश करूगी Speaker 2 (2:26) मेरा नाम दीपक है। यह आदसा साल 2011 का है जब मैं सिर्फ 12 साल का था। दिले की भाग तोड़ और गाड़ियों के शोर से दूर। मैं उस साल गर्मियों की लंबे छुटियां बिताने अपने गाउ गया हुआ था। उत्तर प्रतेश की उन्नाव जिले का भटोली गाउ। गा� Speaker 2 (2:54) वहाँ की मिट्टी की खुश्बू और रात को खुले आस्मान के नीचे चट पर खटिया बिचा कर तारू को देखते हुए सो जाना ये सब मुझे बेहत पसंद था लेकिन उस गाउ में एक ऐसी जगत थी जिसके बारे में बात करते ही बड़ों के चेहरों का रंग बदल जाता Speaker 2 (3:17) हमारे घर की छट से लगबग 200-300 मीडर की दूरी पर एक फुलवारी थी, एक बहुत पुराना मगीचा, और उस मगीचे के ठीक बीचो बीच खड़ा था एक पुराना बहुत विशाल गूलर का पेड़। उस पेड़ का आकार बड़ा अजीब था। उसकी डालिया आम पेड़ों की तरह उपर आस्मान की तरफ नहीं फैली थी। बल्कि जमीन की तरफ जुकी रहती थी। जैसे कोई बूड़ा इनसान कमर मोड कर नीचे किसी चीज को घूर रहा हो। दिन के वक्पी उस पेड के नीचे एक अजीब सी ठंडग हमेशा फैली रहती थी। दादी और गाओ के बड़े बुसुक हम बच्चों को सक्ती से टोका करते थे। उनका एक ही नियम था कि जाहे तोपेर के बारा बजे हो या रात के बारा उस फुलवारी की तरफ अकेले कदम Speaker 2 (4:20) जो इंसानी समझ से परे थी। Speaker 2 (4:25) जो भी वहाँ जाता था या तो अपनी सुत्पुत खो बैठता था या फिर कभी नॉमल नहीं हो पाता था। बारा साल की उम्र में दिमाग हर चीज़ पर यकीन नहीं करता तो मुझे लगा ये सब शैदगाव के बड़ों के बनाए हुए किस्से हैं ताकि बच्चे अकेले ध� Speaker 2 (4:54) में महिने की आखरी हफ़ते की वो रात मेरे इस विश्वास को हमेशा के लिए तोड़ने वाली थी। Speaker 2 (5:07) उस दिन मौसम हज से ज्यादा खराब था, मेजून की वो चिपचिपी दंग होग देने वाली करमी हवा का एक छोका तक नहीं चल रहा था, छट पर सभी परिवार के लोग अपकी अपनी घटिया पर सो रहे थे, चारो तरफ सरनाटा था, बस दूर कहीं से जिंगूरों की लग Speaker 3 (5:34) पाग Speaker 2 (5:35) रात के करीब एक या टीड बजे कर रहा होगा। अच्छानक मेरी नीन खुल गए। कर्मी की वज़े से पूरा शरीर पसीने से चक-चक कर रहा था। कला सुख चुका था और मुझे बाथरूम के लिए उठना पड़ा। मैं लड़खडाते हुए नीन में खटिया से उत Speaker 2 (5:57) लेकिन छट की उस कोने पर पहुँचते ही पता नहीं क्यों मैंने एक अंजाना सा खिचाव महसूस किया मेरी नजर बिना सोचे समझे सामने अंधेरे में फूल फैली उस फुलवारी की तरफ चली गए। आस्मान में हलकी सी दूधिया चांगनी थी और इस धुन्दली रोशनी में वो गूलर का विशाल पेड़ एक काले पहाड की तरह दिख रहा था। Speaker 2 (6:30) मैं वापस मुनने ही वाला था कि तभी पेड की एक मोटी जुकी हुई डाल के पास मेरी नजर किसी चीज पर अटक गई। वहाँ कुछ था। मैंने आखे सेकोड कर ध्यान से देखने की कोशिश की। दिमाग ने तुरंत लॉजिक लगाया। शायद किसी ने पेड पर कोई बो Speaker 2 (6:55) पर अगले ही सेकेन मेरा दिमाग सुन पड़ने लगा क्योंकि हवा तो चल ही नहीं रही थी पूरा गाओ बे जान पड़ा था पेड़ का एक पत्ता तक नहीं हिल रहा था तो वो चीज कैसे हिल रही थी Speaker 2 (7:12) और फिर वो सफेद आकार धीरे धीरे पेड़ से अलग होने लगा। Speaker 1 (7:18) एक नहीं, दो, Speaker 2 (7:21) दो सफेद आकरतियां, जो पेड़ के नीचे हवा में तहल रही थी। उनके शरीर पर सफेद लिबास था, पर उनका कोई वजन नहीं लग रहा था। उनके पेड़ जमीन से करीब एक देड� Speaker 2 (7:43) और उनके लिबास एक अचीब सी सफीद सी चमक निकल रही थी जो उस अंधेरे में भी बिलकुल अलग से नजर आ रही थी और ये देख मेरा दिल इतनी तीजी से धडड़कने लगा कि कानों के पर्णे तक उसकी धगधग गूँझने लगी रीर की हटी में एक ऐसी बरफीली स Speaker 2 (8:12) मैंने डर के मारे जटके से अपनी दुनों आखे कसकर बंद कर ली दिमाग में एक ही खयाल चल रहा था ये मेरा वहम है मैं नीन में हूँ ये धूप और थकान का असर है शायद पर मैं जानता था मैंने क्या देखा था सो मैं मनी मन हनुमान