EP 6 - CEC Gyanesh Kumar के ख़िलाफ़ Indian Express Investigation का सोर्स कौन था, रीतिका चोपड़ा ने बताया

Saam Daam Dand Bhed

This episode explores an Indian Express investigation into internal dissent within the Election Commission of India, where commissioners hav

Key takeaways

  • Ritika Chopra revealed that Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi recorded at least 14 formal objections over 10 months regarding decisions made without their knowledge.
  • S.Y. Quraishi expressed concern that the SIR process is shifting from an 'inclusion' mindset to one focused on excluding voters under various conditions.

Main topics

  • Election Commission internal dissent
  • Voter registration and SIR process

Notable quotes

The thing that protects any democracy is that its institutions are working so well.

Conclusion

The episode underscores the critical need for institutional transparen

Transcript preview

Speaker 4 (0:00) देवियों और सज्जनों सामदाम दंडभेद के एक और एपिसोड में आपका स्वागत है ये इंडियन एक्सप्रेस हिंदी का वीकली पॉलिटिकल शो है इसे आप यूट्यूब, फेजबुक, इंस्टाग्राम के अलावा आउडियो प्लेटफॉर्म्स पर भी देख सकते हैं Speaker 4 (0:28) उसके बाद से देश भर में चर्चा है कि सब कुछ चुनाव आयोग के बीच ठीक नहीं है और ये बात सिर्फ आयोग के अंदरूनी कामकाज की नहीं है ये हम से और आप से जुड़ी हुई है पर इसके साथ साथ देश में कुछ और सुर्खियां भी थी और मुझे सब जुड� Speaker 4 (0:56) इंडियन एक्सप्रेस की एक लड़की पूरे देश को ये बता रही हो कि डिमोक्रेसी को किस तरह की सुरक्षाओं की, किस तरह की निगरानी की जरूरत है। हम और आप अपने अपने घरों में जब अपने अपने पित्रिसत्ता के तरक खोशते हैं तो याद रखें जितनी द� Speaker 4 (1:24) उतनी दफा रितिका चोपडा जैसी जनलिस्ट बाहर निकलती हैं और बेखौफ होकर अपना काम करती हैं सामदाम दंड भेद में आज हम विस्तार से बात करेंगे चुनाव आयोग के भीतर की गरबडियों के बारे में किन नियमों की धज्जियां उड़ाई गई और ग्याने� Speaker 4 (1:43) अब तक चुप क्यों है और प्रेस लीज के नाम पर जो लीपा पोती की गई है वो कब तक कायम रहेगी और क्या सुप्रीम कोड किसी किसम की सक्रीता दिखाएगा या वो भी चुनी हुई चुप्पियों के अंधेरे में जीता रहेगा Speaker 4 (2:07) उसके मुद्दे पर आएंगे, उसके पहले आपका परिचे महमानों से करवा देते हैं, हमारे साथ हैं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, S.Y. Kureshi जी, बहुत-बहुत स्वागत है सर आपका, हमारे साथ हैं हमारे पॉलिटिकल ब्यूरो सेब दीपतिमान तिवारी जी, आ� Speaker 4 (2:35) रितिका चोपड़ा है, रितिका जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है सामदाम तंग भेद में। I have said it off camera, I want to say it on camera as well. We are very honored to work with you. You have done great journalism. It should be taught in the institutions. And the thing that protects any democracy is that its institutions are working so well. The thing that makes journalism journalism is that we are fulfilling our role as watchdogs. Speaker 4 (3:06) Indian Express के भीतर भी ज़रियनिजम की दुनिया में और देश में एक नया एग्जाम्पल सेट किया है। So, thank you so much. Thank you. रितिका ने मुझे पहले कह दिया था कि ज़ादा था रितिका बेटा. मत करना हूँ. No, I really mean it. और रितिका जी हमारे मुंबई अडिशन की resident editor हैं. इनको चमेली देवी जैन पुरुसकार मिल चुका है, इनको रामनाथ गोइन का एक्सलेंस इन जैनरिजम अवार्ड मिल चुका है, और गोइन का अवार्ड इनको एलेक्शन कमिशन पर ही सीरीज आफ स्टोरीज के लिए मिला था, जब देश को 2019 में यह पता चला था कि एक चु अमिश्या को कोड आफ कंडक्ट के वालेशन के मामले में जब बरी कर रहा है तो मैं इस बरी की जाने से सहमत नहीं हूँ आपी की स्टोरी थी? हाँ, हमारी स्टोरी ठीक है चलिए इससे पहले कि मैं कुरेशी साप से दिप्तिमान से बात करूँ मेरा पहला सवाल वही है जो प� Speaker 5 (4:24) अच्छी प्रोसेस बताने से पहले मैं थोड़ा से ये clarify करना चाहती हूँ कि of course हम थोड़ा देखते हैं social media पर क्या बाचीत वे गेरा भी हो रही है तो लोग जैसे कह रहे हैं कि किसी ने आपको कागस पकड़ा दिये या आप कहीं पे जाके मिली और इसने दे दिये आपको काग Speaker 5 (4:54) जर्नलिजम पत्रकारता ऐसी नहीं होती है, मैं Election Commission दस साल से कवर कर रही हूँ, और ये I'm sure दीप्तिमान भी मेरे साथ agree करेंगे, कि जो भी कोई beat reporter होता है, वो बहुत समय बिताता है एक beat को समझने में, उसको परखने में, लोगों से मिलने जुलने में, उनका एक तरह से अपने आप सिर्फ तत्यों पे काम करते हैं और ये एक तरह से इंडियन एक्सप्रेस की फिलोसिबी भी रही है कि हम फैक्ट्स पे काम करते हैं तो जब लोगों को वो विश्वास आ जाता है तो लोग थोड़ा से आपसे धीरे धीरे खुल के बात करते हैं तो खबरे रातो रात नहीं इस तरह की खबरे ओवरनाइट नहीं मिलती हैं, so of course a lot of it is a culmination of having covered a beat for almost 10 years now, but ये जरूर है कि हमें लगभग 7-8 महीने पहले थोड़ा सा अनुमार लग चुका था कि Speaker 5 (6:07) चुनाओ आयोग में तीनों कमिशनर्स के वीच में कुछ मुद्धों पर मदभेद थी वो टिप आफ मिलने के बाद अफकॉस हम लोगों ने लोगों से बात करनी शुरू की ये बाचीत लगभग कुछ महीने चलती रही उस बाचीत के आधार पे हमको इतना एक हमने धाचा तै बट हमारी इंवेस्टिगेशन रफ्तार पिछले दो महीने में पकड़ी की जब हमारा धाचा तैयार हो गए और अगर किसी को कागस देनी थे तो हमें चार राजियों में जाने की जुरूत नहीं थी हमें कुछ input मिले, कुछ कागस मिले, उसके आधार पे हमने जाके, वो कई हमको कागस ground से भी जाकर मिले, हम लोग गए हैं, हम of course Delhi में, Mumbai में, Goa में, और Calcutta, हमने चार शहरों में गए हैं, over a period of the last one month, little over the last one month, and again, the short answer to your question is, it didn't happen overnight, it was obviously based on a tip-off, कि टिप ऑफ मिलने के बाद हमने लोगों से बात की और फिर उसके बाद जो भी इंवेस्टिकेशन जो भी कतर सबको पता है कि फिर आप ग्राउंड पर जाते हैं उसकी पुष्टी करने की कोशिश करते हैं और सारे सबूत इकठा करने की कोशिश करते हैं और वो सब होने के बा वो सारी ड्यूडिजिलेंशन्स के बाद ही एक कोई इंवेस्टिकेशन निकल कर आती है, ये कोई ओवरनाइट नहीं होता है। Speaker 4 (7:44) देवियों और सज़िनों, ये टिपड़ी आप चाहें तो एक बार रीपले भी कर सकते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर इस तरह की बहुत थिरीज � Speaker 4 (8:04) कि खबरें इन्डियन एक्सप्रेस में इस तरह से प्लाट नहीं होती हैं और दूसरा यदि इतनी आसानी से ही सब कुछ उपलब्द था तो कोई और क्यों नहीं कर पाया इसलिए ये सवाल सबसे पहले पूछा गया विस्तर चर्चा से ताकि जिनके मन में किसी किस्म का शुबह तैकी जाती है कि क्या सारे facts दुरुस्त हैं और उसके बाद न्याय का सिद्धानत ये कहता है कि जिसके बारे में खबर कही जा रही है उसका पक्ष भी जाना जाए और इस case में भी हमने election commission के तीनों ही आयुक्तों मुख्य चुनाव आयुक्तों और बाकी दो के पास भी reach out किया � Speaker 5 (9:01) हमने उन्हें एक दिन का समय दिया था जब एक दिन में भी समय जवाब नहीं आया तो we took the call to wait extra because we believe in fairness and accuracy but उसके बाद जब हमें पता लागा गई शायद जवाब नहीं आएगा we went ahead with the investigation वो अलग बात है कि investigation के आते ही उनका एक statement आगे जो शायद हमें पहले मिल जाता तो हम investigation में भ Speaker 4 (9:31) I'll come back to you. Kureshi साहब आप तो मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं हम लोग तो सुप्रीम कोर्ट में कुछ बहसें देखते हैं प्रेस कॉन्फरेंस देखते हैं जिसमें कभी शेरोशाहरी होती है कभी और दूसरे किस्म के आईपरबोल होते हैं पर हमें लगता था कि बाई मिनिमम इतना तो एक्सपेक्ट किया जा सकता है कि अगर सर्वसम्मती नहीं है तो बहुमत से फैसला हो और इन्डियन एक्सपेस की रितिका चोपडा की इंवेस्ट Speaker 1 (10:04) तिकी ये तो बड़ा जो explosive story रिच्चिकने छापी जिसके लिए मैं उनको मुबारक बात देना चाहूँगा क्योंकि election commission से dissatisfaction तो काफी दिन से चले रहा था और डेट साल से जब SIR की exercise बिहार में शुरू ही उसके बाद मैं 20 पे media पे आया हूँ और मैं तो शुरू से इसको question कर � Speaker 1 (10:33) दिमाओं में जिज़क होती थी कि कोई यह नहीं कहे दो को अपनी ही institution जिसमें कभी यह खुद head था और आज उसको बुराबला कह रहा है वो एक संकोश्चा था लेकिन उसके बावजी जब इतनी ज्याती large scale हो रही थी तो अगर बोले नहीं तो वो भी नाइंसाफी और बेमानी जो outspokenness थी उस सब को vindicate कर दिया उसको justify कर दिया कि ये तो देड़ साल से में कह रहा था कि सब जो हो रहा है गलत हो रहा है, illegal हो रहा है, बेमानी का हो रहा है वो आपने तो documentary सुभूत के साथ पेश कर दिया तो आपको salute है इसके लिए तो जो कुछ सामने आया वो बहुत ही चिं Speaker 4 (11:28) जी एक मैं आप तीनों से ये ओपन सवाल है कि विपक्ष इस इन्वेस्टिगेशन के बिना पर अब ये कह रहा है कि सारे चुनाओं कैंसल किये जाएं ये किया जाएं एक तो हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं इन्डियन एक्सप्रेस का साफ तोर पर मानना है हमने अपने संपा जिसको लेके सुप्रीम कोड तक बात गई फिर ट्राइबियूनल बने उन सब को बहतर तरीके से किया जाना चाही ताकि एक भी वोटर ना छूटे रितिका सबसे पहले आप बताएंगे जो SIR की प्रक्रिया को लेके ओवर और किटसम चल रहा है एक आम वोटर हो ताकि समझ में Speaker 5 (12:22) चुनाव आयोग एक्शिली और अफकॉस कुरेशी सर मेरे से अग्री करेंगी उनकी एक फिलोसफी रही है कई दशकों से मतलब नो वोटर लेफ्ट बिहाइंड Speaker 4 (12:32) उनका Speaker 5 (12:33) हमेशा से एक एटिट्यूड रहा है कि हमारी पूरी कोशिश वो रेडी चोटी का जोर लगाते थे कि जितने जादा जादा लोग मददाता बन सकें उसके लिए उन्हें ने कैमपेइन किया एक नाशनल वोटर्स डे भी स्टार्ट किया � Speaker 5 (12:55) यह ऐसा आया जब शुरू हुआ, जैसे आपने कहा, यह कोई नए प्रक्रिया नहीं है, कई बार पहले भी हुआ, पिछला वाला, दो, बीस साल से जादा पहले हुआ था, 2003 में, प्रक्रिया नहीं है, लेकिन इस बार शायद जो नए तरीके अपनाए जा रहे हैं, वही सेम exercise को conduct Speaker 5 (13:24) थोड़ा सा जोड़ जादा है exclude करने का Speaker 3 (13:27) बाहर निकालने पर Speaker 5 (13:28) जादा कि जो नहीं eligible है ठीक है जो नहीं eligible है उनको नहीं भी होना चाहिए मजदाता सूची में Speaker 3 (13:34) लेकिन Speaker 5 (13:35) आपने इतने सारे conditions अब लगा दिया है कि उस पे आने पर आपको मतलब बहुत जादा मेहनत लग रही है और हमारे Speaker 5 (13:52) आप उनको भी नहीं ला रहे मददाता सूची में तो दिक्कत बेसिक्टी वहाँ आ रही है कि चुनाव आयोग का जो पहले एक अटिट्यूट था इंक्लूजन का अब ऐसा लग रहा है कि ज़ादा जोर इस पे है कि कितने लोगों को हम बाहर निकाल सके और ज़ादा तर जो म� Speaker 5 (14:14) इतना clearly बाहर आके बोल नहीं रहे लेकिन बार-बार वो यही बोल रहे हैं कि कानूनी तोर पे जो भी process है आप उसी को follow करें कि अगर जो ERO ग्राउंड पे है अगर जो पूरा process decentralized है तो उसे वैसे ही रखें करें SIR लेकिन कानूनी तोर पे करें कुछ नया मत ट्राइ कीज़े Speaker 4 (14:36) जमीन पर ये कवायत कैसी दिखती है दीप्तिमान हमारे साथी है बिहार के रहने वाले भी है और बिहार का चुनाव डिटेल में कवर भी कर रहे थे और अगर आपको ध्यान होगा तो ये जुलाई अगस्त 2025 से पहली हसायार बिहार में ही हुई थी उस Speaker 1 (14:49) जी Speaker 4 (14:50) इस दफा की क्या अपने � Speaker 3 (15:07) इसमें तो यह भी हुआ कि पॉलिटिकल पार्टीज ने भी जो है वो कवाया करीग भाई कम से कम जो उनके वोटर हैं वो छूटना जाएं उनको लेकर बसों में भरके ले जाया गया उनके मदद की कई पॉलिटिकल पार्टीज ने अपने वह मतलब ऐसी टीम बनाई जिसमें कि जो कि मदद कर रहे थे लोगों कि भाई अपना डॉक्यूमेंट तुमको क्या चाहिए क्योंकि गांव के गरीब लोग होते हैं उन्हें जानकारी भी नहीं होती कि कैसे क्या करना है इतनी लंबी फेहरिष्ट होती है डॉक्यूमेंट की प इस तरह से वहाँ पे एक SIR का लंबी प्रक्रिया भी चली उसके बाद एलेक्शन में ये मुद्धा भी बना राहूल गांधी ने वहाँ रैली भी की वहाँ पे वोट अधिकार यात्रा निकाली गई जिसमें तेजस्वी यादव भी सामिल हुए हला कि इसका एलेक्टोरली बह Speaker 3 (16:12) और प्रचंड बहुमत से अगर हम कहें तो NDA जो है वापिस सरकार में आई, 200 से जादा सीटें आई, और हम भी जब घूम रहे थे तो SIR as a political narrative उबरकर हमें सामने आता हुआ नहीं दिखा, उसके काई कारण भी थे, जैसा कि एक राजद के ही नेता ने मुझे समझाया भी, कि दे गणना में बाहर हो गया, SIR की प्रक्रिया में बाहर हो गया, या जो अंदर हो गया, जो अंदर है उसके लिए यह मुद्धा नहीं है, Speaker 4 (16:47) जो Speaker 3 (16:48) बाहर हो गया चुनाव के लिए वो मुद्धा नहीं है, यानि कि he doesn't matter to Speaker 4 (16:52) the election, हाँ, क्योंकि अब तो वो बाहर है, तो उसका vote Speaker 3 (16:55) नहीं है, Speaker 4 (16:56) तो Speaker 3 (17:01) उसके लिए ये मुद्दा खतम हो गया, Speaker 4 (17:03) कि Speaker 3 (17:03) भाई मेरा काम तो हो गया, मेरा राशन कार्ड बन गया, मुझे राशन मिल रहा है, ये इसको नहीं मिल रहा Speaker 7 (17:07) है, Speaker 3 (17:07) वो देखे, तो हाला कि विपक्ष ने उस वक्त इसको और भी चीज़ों से जोड़ने की कुछ लिखी, कि भाई अभी आ यह सारे मुद्दे जो हैं वो बने रहे पलायन बिहार में बड़ा मुद्दा रहा इंडस्ट्रिलाइजेशन को लेके एक पॉलिटिकल नेरेटिव बना रहा उस पे एलेक्शन हुए लेकिन यह सारी कवायद में यह जरूर हुआ कि यह एक राष्ट्रिय मुद्दा बन गया प वेस्ट बिंगॉल के एलिक्शन में वो और भी ज़्यादा प्रखर हो गया। Speaker 4 (18:02) कुरेशी साहब बिहार की चर्चा हो रही थी मेरे कहाल से बिहार में ही जब के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जब चर्चा चल रही थी कि पहले नोए आधार कार्ड को भी नहीं माना था पैचान के तौर पर और तब बड़ा फसाद हुआ था कि साहब जो अनपड हैं उनको आ Speaker 4 (18:36) अगर एक डॉकमेंट Speaker 1 (18:49) सबसे ज़्यादा लोगों के पास थी, वो अधार थी. बाकी चीज़ें, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पासपोर्ट तो 2 % के पास होता है. वो birth certificate हर एक के पास नहीं है तो आधार सब के पास था उसको भी इन एलिजिबल डिकलर कर दिया जब जज्ज साब ने इनको लताड़ा तो एक मिनट के अंदर अच्छे अच्छे ठीक है आधार को include कर लेते हैं इतनी असानी से विश क्यों नहीं जज्ज साब ने कहा होता है एल Speaker 1 (19:20) लेकिन इन्होंने कहा कि साथ चुके electoral roll को ही हम question कर रहे हैं इसलिए उसके आधार पर बनावा जो आधार card वो water card है वो भी unreal हो जाता है तो उन्होंने नहीं माना अगर वो माना होता तो सबसे ज़्यादा आसानी होती और सबसे कम लोगों को असविधा होती लेकिन उन्होंने इस तो मेरे पास एक former ambassador जो नेपाल में था उनका एक phone आया क्योंकि आपने बाखे सारी बातों तो ठीक लिखी लेकिन आपने एक चीज़ बिस्ट कर दी और वो ये किसा नेपाल इंडिया का free border है और आप किसी भी document के साथ identity proof के साथ जा सकते हैं और normally वो identity proof ये water card होता था ये आधार अब सिरी वोटर कार्ट के बेसिस पर, मैं बीसियों बार वोटर कार्ट के बेसिस पर कहूँ, पासपोर्ट भी था मेरे पास, लेकिन पासपोर्ट तो सिरी दो परसन बिहारियों के पास है, तो अब अगर निपाल गवर्नमेंट ये कहते है कि साब आप ये फोटो कार्ट से, ए परशानी होती तो इस कितन की थॉटलेस्टली बेतुकी बात और एक चीज सौरव जी मैं आपको बताना चाहूँगा आपने चेल से शुरू में कहा था कि SIR से तो आपको कोई आपत्ति नहीं है मुझे है क्योंकि SIR Constitution में कई mention नहीं है Representation of People Act में mention नहीं है Electors Registration Rules of the 1960 तीनों में एक स्पेशल इंटेंसिव रिविजिन SIR Speaker 4 (21:06) क्या Speaker 1 (21:06) मेंचन्ड है रेपरेजेंटेशन पीव लाइट के एक सेक्षन में 21 यह क्या है जिसमें यह है कि एलेक्शन कमिशन जो भी वोटर रोल बनाएगी उसमें इंटेंसिव रिविजिन केंबिडन इन एक कॉंस्टिट्यूएंसी और ए हमारी interpretation उसकी होती थी कि आप सारे role तो बनाए रहे हैं लेकिन intensive आप सिर्फ एक ऐसी constituency में या उसकी part constituency में जहाँ पर जैसे बाड आ गई है आपका सारा record भाई गया तो Saurav Divedi जो अब तक electoral role पर थे वो record ही खतम हो गया Speaker 4 (21:43) तो Speaker 1 (21:44) हमको नए series से reconstruct करना पड़ेगा Speaker 4 (21:46) तो Speaker 1 (21:47) वहाँ पर intensive revision allowed था और दूसरी चीज जिस पे इन्होंने आधार पे ये सब एक्सरसाइज एक्सरसाइज शुरू की 2002 में ही जो इंटेंसिव रिविजिन बिहार में हुआ था उस वत की कमिशन उस वत की कमिशन में भी समझदार लोग होते थे इतने समझदार नहीं थे इतने आजकल है लेकिन उन् Speaker 1 (22:15) और सिर्फ सबरी रिविशन क्या करेंगे कि वो एक साल में जो चेंजेस हो जाती हैं उनको अपडेट करने के लिए और वो क्या चेंजेस हो जाती है किसी की डेथ हो जाएगी तो उसको डिलीट करना चाहिए बिल्कुल करना चाहिए कोई वहाँ से माइगुरेट कर गया है उसक inclusion कही होती भी दिखाई नहीं थी Speaker 4 (22:37) तो Speaker 1 (22:38) इस के समगी जो changes होती है ये लो summary revision के जरीए दाखे करता है बिहार में इन्होंने जब शुरू किया था तो पहले दिन ही कहा था कि हम basically गुजपहट्यों को पकड़ने के लिए exercise कर रहे हैं बड़ी अच्छी बात है गुजपहट्यों को जर� Speaker 1 (23:04) बताईए कितने पकड़े वो आज तक क्यों नहीं बताए पता नहीं रितिका तुम्हें कहीं ये से मिलाए कितने बताए और उस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी उनसे नहीं पूछा जो कोर इशू था लेकिन हमने अखबार में यहीं कहीं पढ़ा कि 500 फॉरेनर पाए गए थे 8 करो Speaker 1 (23:29) पांच सौरी आठ करोड को पांच सौर लोग मिले फ़ॉर ने जिसमें डेड़ सौ बंगलादेशी थे और साड़ा तीन सौ नेपाल की हिंदू औरतें जो शादी करके आए थी Speaker 4 (23:38) इन Speaker 1 (23:39) डेड़ सौ कोड के लिए आपने जो सितम ढाया ये इसका तो कोई जवाब देना चाहिए मेरा � Speaker 1 (23:52) सबरी रिविशियन में जब बिलो आजकल होता है वो जब भी होता था पिछटर साल से हो रहा है बिलो तो खैर बीच साल पहले हमने शुरू किया था कि घर घर जब बिलो जाये तो पूछेगे सौरब जी आपके घर में ये चार बोटर हैं इनकी ये नाम है ये उमर है सब ठीक ह Speaker 1 (24:14) कि सौरव जी आपने पड़ास में आपने कोई नया चेहरा तो नहीं देखा जो foreigner हो सकता है और गुशबैटिया हो सकता है आपको तो जरूर दिखाया देखा नेबर को तो सबसे पहले दिखाई देता है हाँ जी छह मिनी से मैं एक नया face यहाँ देख रहा हूँ उसका नाम बता और जैसे दिप्तिमान जी ने कहा कि जो इसका नाम आ गया वो फ़दा का शुकर क्या और बाकी चिंता कि मुझे क्या चिंता बाकी जाएं भाड में जिनका ने हुआ उनकी तो हर सिटिजनशिप चिंजाएगी उनके सारे बेनिफिट चिंजाएगी दो तीन चीफ मिनिटर ने � Speaker 1 (25:09) और एक चीज़ मैं बार बार कहता हूँ कि बहुत अच्छा काम किया हमारे चीफ इलेक्शन कमिशनर साहब ने सिरीब मैं कहता हूँ एक लाइन का एक एफिडेविट दे दो कि मैं प्यूरिटी ओफ एलेक्टरो रोल की बहुत जुरूरी चीज़ है कि प्यूरिटी ओफ रोल के तो मैं इसके लिए criminal liability ले लो, criminal liability न भी ले, लेकिन ये तो बता दे कि मैं certify करता हूँ कि अब role pure हो गया है, वहाँ तो 13 करोड आबादी से कम 13 करोड लोग तो delete हो गया है, आबादी की problem solve कर दी नो ने तो. जो population commission नहीं कर पाती थी पितिका जब Speaker 4 (25:57) ये पूरा SIR का process शुरू हुआ ज्यानिश कुमाने press conference की उस समय आयुक्तों के बीच में सब रजामंदी थी सब process को लेके जिस तरीके से बिहार में हुआ या उसके बाद हुआ do we have any info on that Speaker 5 (26:10) उसमें रजामंदी थी because हमारी जो colleague है दामनी नाथ प्रक्रिया शुरू हुई उन्होंने शायद पिछले साल नवंबर या दिसंबर में डेट भूल रही हूँ उनकी बहुत अच्छी न्यूज ब्रेक थी तब उन्हें आर्टी आई के द्वारा डॉक्यूमेंट्स मिले थे जिसमें हां रजामंदी थी लेकिन तब सुबीर सिंह स Speaker 5 (26:37) अपने फाइल में की noting जरूर लिखी थी और शायद मतलब हम इस बात का अनुमानी लगा सकते हैं कि उनको शायद लगा कि जिस तरह के हम लोग conditions लगा रहे हैं हो सकता है लोगों का harassment हो उसमें तो उनने एक point जरूर लिखा था मैं quote नहीं कर रही बट जितना मुझे याद है कि प तो उस वक्त सरसम्मति से हाँ जरूर हुआ लेकिन उन्होंने जब ये एक line डाली थी फाइल में तो आप बाद में देखेंगे अब यह हमें नहीं पता कि उनके लिखने के बाद order में आया बट वही line order में भी थी उन्होंने order मतलब ये order जो सारे ground level चुनावी अफसरों को ये order � Speaker 5 (27:31) हमने जब आपत्तियां देखी फाइल पे ये नहीं वो SIR के खिलाफ नहीं है कुछ जो नई तरीके अपनाये जा रहे हैं वो बार बार यही कह रहे हैं इसे कानूनी तौर पे किया जाए Speaker 4 (27:44) पहले भी आपने अब्जर्व कियें इलेक्शन कमिशन में इस तरह के इंडिफरेंसिस मत देत किस तरह की हिस्ट्री सामने आई है Speaker 5 (27:51) अब्जर्व मैंने परसली नहीं किया है पर पिछले जो जैसे मैंने कहा 10 साल में मैंने काम किया तो अफकोस वन मेन डिफरेंस अफ उपिनियन ज और अशोक लवासा जी एक तरफ थे और जैसे आपने अपनी introduction में ही बताया था कि उन्हें ने कहा था वो सहमत नहीं थे कि जो दो तीन शिकायते आई थी प्रधान मंत्री मोदी जी के खिलाब और अमिच शाजी के खिलाब वो सहमत नहीं थे उन्हें लगा था कि action लेना चाहि� Speaker 5 (28:31) थोड़ा समझाना चाहती हूँ कि तीन मेंबर का कमिशन होता है अभी ग्यानियश कुमार जी, सुक्वीश सिंग्जान्दू जी और विवेक जोशी जी है कानून में लिखा है कि चुनाव आयोग में काम सरसमती से या कंसेंसस से होगा और जहांपी भी मदभेद हुआ वहाँ पे आप मज़ॉरिटी से करेंगे मतलब अगर जो दो में से तीन एक तरफ हो गए तो जो वो चाहते हैं वही होगा अब वो दो में से तीन हो सकता है कि ग्य बढ़ामद भी पहले भी हुए हैं जैसे मैं अशोक लवासे जी का बताया जब एन गोपाल स्वामी भी चीफ एलेक्शन कमिशनर थे तब उनने चावला जी के खिलाफ भी काफी शिकायत की थी लेकिन ये जो मदभेत है मेरे हिसाब से अलग जादा है और या आश्चरे जानक � Speaker 5 (29:30) decision ले सकते हैं और जो वो decision लेंगे वही होगा वही लागू होगा वो आके कह रहे हैं कि हमें तो पता नहीं क्या हो रहा है हमें ये चीज पता वो basically decision लागू होने के बाद फाइल पे लिख रहे हैं कि हमें media से पता लगा है कि ये हुआ है ये कब हुआ ये