Dhurandhar का आंखों देखा सच, USA का पतन और कैसे होता है Nation का Rise & Fall? : Padhaku Nitin

Padhaku Nitin

In this episode, former diplomat Rajiv Dogra discusses his book 'How Nations Fail and the Unmaking of America's World.' The conversation exp

Key takeaways

  • Rajiv Dogra argues that the failure of nations is often driven by leaders who prioritize personal or partisan interests over inclusive institutions.
  • The decline of US influence is linked to psychological defeats in conflicts like Vietnam and Afghanistan, exacerbated by modern social media transparency.

Main topics

  • National Rise and Fall
  • US Geopolitical Decline

Notable quotes

How nations fail... how men get affected, men women get affected, how families get affect.

Conclusion

A profound exploration of how institutional strength and leadership de

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Speaker 2 (0:43) इनसान कई तरीकों से सीखता है कभी सवाल करके कभी प्रियोग करके और कभी दूसरों को देखकर भी राष्टर भी ऐसे ही सीखते हैं और जैसे राष्टर सीखता है ये आज तक रेडियो है Speaker 1 (0:55) वैसे ही राष्टर के Speaker 2 (0:56) नागरिक भी सीखते हैं अगर आपकी थोड़ी भी रूची है ये जानने समझने में कि कोई देश चलता कैसे है, विदेश नीती कैसे बनती है, सही विदेश नीती क्या होती है, और कोई देश कैसे राइज पर जाता है, कैसे उसका फॉल होता है, अगर ये सब सवाल आपको परिशान करते हैं, तो ये � Speaker 2 (1:26) पहली posting आपकी Stockholm में थी, फिर आप 90 के दशक में, Council General थी Karachi में, वही दौर, जब धुरंदर हो रहा था, और बाद में आपने Romania और Italy में भी, Indian Ambassador की तौर पर सेवाय दी, किताब बहुत सारे सवालों का जवाब देगी, मॉंटाज देखकर आप समझी गए होंगे, पाकिस्तान की ब तो जैसे जैसे सवाल आपके हमारे मन में आते हैं उन सभी का जवाब राजीव डोगरा साहब देने वाले हैं तो बहुत बहुत स्वागत करता हूँ आपका पढ़ा कुनितिन के इस एपिसोड में और आपका भी राजीव डोगरा साहब बहुत बहुत स्वागत है सर ये जो आ Speaker 2 (2:10) ये किताब जब मेरे हाथ में आई थी तो मैं थोड़ा confused हुआ मुझे लगा क्या मैंने किताब पहले पढ़ी है लेकिन फिर मैंने जब देखा तो पाया कि लगभग मिलते जुलते शीरशक के साथ एक किताब पहले भी पबलिश हो चुकी है और उसका नाम है Why Nations Fail इस किताब ने � Speaker 2 (2:36) तो वो थी Why Nations Fail ये How Nations Fail और इस किताब के बारे में आपकी किताब के बारे में जब मैं थोड़ा बहुत और देख रहा था तो एक दो जगह समिक्षाएं जो छपी तो उसमें ये भी कहा गया कि इससे पहले Why Nations Fail ने Nobel पुरसकार जीता है लेकिन How Nations Fail को भी एक आज Nobel तो मिलना चाहि� Speaker 2 (3:05) आप भी inclusive और extractive institutions जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं इसमें आर्थिंग मॉडल पर घहराई से हला कि आप उतनी बहस नहीं कर रहे हैं बलकि आसपास बहुत सारी ऐसी चीज़े हैं जिन्ने आप रखते हुए चलते हैं कि क्यों एक देश महान होता है कैसे उसका decline होता है कौन सी संस्थाएं हैं जो अगर अस्तित्तु में रहें तो कोई तानाशाही भली क्यों ना हो, मतलब वहाँ तो आटोक्रेट आपने लिखा है, तब भी देश बच सकता है, तो क्या आप मानते हैं कि आपकी खिताब उस पुरानी खिताब का ही एक विस्तार है, या ये बिल्क� Speaker 1 (3:57) तो पहली मेरी किताब थी, Where Borders Bleed, इंडिया पाकिस्तान के उपर, और शुरुवाच से कि कब से ये जो जख्म था, गहरा होना शुरु हुआ, separation का, तो तब मैंने देखा कि, जो history हमारी है, और लिखी जो जा रही है, वो शुरु भी होती है अंग्रेजों से, और खत्म भी होती Speaker 1 (4:28) थोड़ी जरूर हमारे historians में exception थी जिननों ने अपनी तरफ कोशिश की पर सरफ कोशिश की conclusion पे नहीं पहुंचे तो जब मैंने where borders bleed शुरू की मैंने का मैं अपना एक Indian perspective दूँगा कि क्यों हुआ कैसे हुआ और उसका मैं एक उधारन देता हूँ एक freedom at midnight है Dominic LaPierre वगला की वो ज के चक्कर में मिलने गए तो ने कहा कि ये partition का आपने कैसे ख्याल किया जब जिना मरने वाले थे तो उनका जवाब Mountbatten का जवाब ये था कि had I known जिना was dying I would have delayed the announcement and there would have been no partition तो मैंने कहा अच्छा मैंने सिर्फ फोटो देखनी शुरू की जिन्हा की, 1920 से और फिर 1947 तक, 1920 में बड़ा हैंसम लगता था, 1930 में मुरजाया हुआ लगना शुरू हुआ, Speaker 2 (5:31) लंडन चले गए था उसके बाद, Speaker 1 (5:33) लंडन चले गए, साथ साल रहे, और 1930 में तो वो बंबई में पार्सी डॉक्टर्स को दिखा रहे थे, 1930 के बाद 7 साल जो 37 तक रहे लंडन में तो बृतिश डॉक्टर्स को दिखा रहे थे, तो यह मैं कैसे मालनूँ कि बृतिश डॉक्टर्स ने अपने MI5 और MI6 को नहीं बताया होगा, Speaker 2 (5:54) और Speaker 1 (5:56) Mountbatten इतना जूठा है उसने ये नहीं बताया कि 1945 में war जैसे ही खतम हुई, Britain ने decide कर लिया था that this country must be partitioned और Mountbatten को जो handing over note दिया उसके predecessor Lord Wavell ने उसमें लिखा था कि Jinnah is dying Speaker 1 (6:16) हमारे historians भी मानते रहे कि यह partition तो होनी थी यह है वो है why couldn't they do that research so वही जो कीड़ा है वो इस title में भी आया Speaker 1 (6:31) जब मैंने पढ़ी नहीं थे वाइ नेशन्स फेल पर जब उनको नोबिल प्रेस मिला तो मैंने कहा सिरफ एकनॉमिक एंगल से देखना चाहिए फेलियर को या कुछ और भी है तो हाव नेशन्स फेल उस तरह शुरू हुई और कई फ्रेंड्स ने भी कहा यार कहा चैलेंज एक् Speaker 1 (6:59) कि I have to be one better and I am glad जो आप review कह रहे हैं और भी बहुत reviews जो हैं वो ऐसे दिल को खुश करते हैं कि you know my day is made every such review is so superlative तो in fact ये Darren सहब भी जरा से नाखुश लग रहे हैं क्योंकि वो टिटर में मेरे को follow करना शुरू करती है Speaker 2 (7:24) हाँ उन्होंने भी आप वो review पढ़े होंगे तो उन्हें लगा होगा कि भाई एक और मिलती जुलते नाम से खिताब आई है देखे author है कौन वो Speaker 1 (7:33) जो new Asian writing है वो तो है भी international पढ़ा भी होगा पहुँचा Speaker 2 (7:38) होगा आप सही कह रहे हैं सर मेरे दिमाग में इबाद कैसे रह गई सही कह र चल रही थे खतो खिताबत इस दोरान और चर्चल उन्हें तैयार कर रहे थे कि वो हिंदुस्तान लोटे और राजनिती में शामिल हों तो सही कह रहे हैं कि उस वक्त जब डॉक्टर्स के पास जा रहे होंगे और वो इंग्लेंड जो पल-पल की ख़वर उस वक्त रखता था अ Speaker 1 (8:19) देखे पाकिस्तान जब किसी को सम्मानित करता है ना तो हमको बहुत questions Speaker 2 (8:24) करने चाहिए चिंता होने चाहिए Speaker 1 (8:26) एक पहले हमारे प्राइम मिनिस्टर को सम्मानित किया था उसका कई interpretations हैं उसमें तो मैं नहीं जाओंगा पर लोगों को पता है और दूसरा ये जो इतने सालों के बाद पा तो एक जो मेरे को ख्याल आता है कि जिना house जो बॉंबे में है Speaker 2 (8:54) वो Speaker 1 (8:54) कब से पाकिस्तान ट्राइ कर रहा है कि हमको दो हमको दो क्योंकि वो बहुत मेंगी जग जिना के लिए इतना मुहबबत नहीं हो उनको वो उसक में जो पैसा है उस लैंड का उससे मुहबबत है और वहाँ वो � Speaker 1 (9:19) तो ये जो है इस नोट वेरी सिंपल मूव कि हम वो सर्टनली हमको याद आ गया है वो पार्सी डॉक्टर पार्सी डॉक्टर नहीं याद आया उनको अपना खुदगर्जी याद आयी है Speaker 2 (9:33) देखिए आप डिप्लोमेट रहे हैं पाकिस्तान में भी रहे हैं तो मैं क्या ही इस पर सवाद करूँगा, आप बहुत सारी ऐसी बाते शायद कहेंगे भी नहीं कभी, जो आपको पता भी होंगी, या आपके जहन में आते भी होंगे, कि ये इसलिए हो रहा होगा, या उसलिए हो रहा होगा, लेकिन मैं बात करूँगा, जरूर करूँगा थो� Speaker 2 (10:04) जो कि सर हमारे दिन रात लगे हैं इस पर पढ़ने में एक चीज आप जो लिखते हैं how nations fail ठीक है ये किताब आजकल तो International Affairs जानने समझने की जिग्यासा है तो Students को पढ़नी चाहिए, Professors को भी पढ़नी चाहिए, Diplomats भी पढ़ें, लेकिन किसी आम इंसान को जिसको ये किसी Airport पर या Bus Adday पर, Market में घूमते हुए किसी Shelf में दिखाई देगी, उसे ये Speaker 1 (10:32) क्यों उठा कर पढ Speaker 1 (10:42) कहां कहां दुनिया में failure हो रहा है कहां कहां घरों का failure हो रहा है कहां कहां petrol महंगा हो रहा है कहां fertilizer महंगा हो रहा है कहां दमाईया नहीं मिल रही है तो how nations fail होते हैं how men get affected men women get affected how families get affected so वो सबका नुकसा जो है वो इस किताब में है कि क्यों शुरुवात कैसे होती है और बढ़के वो जो germ जो है वो कैसे फैलता है so मैंने सिर्फ economics की बात नहीं की society की बात की है, civilizations की बात की है, और देखें, ये काफी मशूर बात है, कि history repeats itself, तो history का जो lessons है, वो भी हमारे लिए बहुत ज़रूरी है, political lessons ज़रूरी है, economic lessons ज़रूरी है, society का behavior ज़रूरी है, और leader का behavior ज़रूरी है. क्योंकि कई nations fail होते हैं सिरफ एक leader के decision के कारण। Speaker 2 (11:44) जैसा अपने उधारन भी कुछ दिये कि अगर Bangladesh बना तो वो इसलिए बना क्योंकि उस वक्त की जो पाकिस्तानी नेता थे उनके अपनी नियत में या अपनी ही हिसाब से लियेगा नेनेव के करण हुआ। Speaker 1 (12:00) बुट्टो के तरफ आ Speaker 1 (12:06) लालच के कारण पावर की लालच के कारण भूप के कारण पाकिस्तान का डिविजिन हुआ क्योंकि एलेक्शन में जीते थे शेख मुझीबूर रहमान की पार्टी पर वो नहीं चाहता था कि एक बंगाली पूरा पाकिस्तान पर रूल करें Speaker 3 (12:20) तो Speaker 1 (12:21) उससे वो जो अत्याचार पाकिस कितनी कीमत चुकानी पड़ी, तीन मिलियन लोग, उसमें ज़्यादा हिंदू थे, वो मरे, कई सडकों पे, धाका की सडकों पे, जो रोड ब्लॉक्स थे, वो लकडी के नहीं होते थे, Speaker 2 (12:49) डंडो Speaker 1 (12:50) के नहीं होते थे, वो बॉडीज के होते थे, हिंदू औरते, हिंदू मेन, उनको, एक कतार में उपर किया जाता था ताकि कारें बस वगैरा रेगुलेटेड वे से जा सके जैसे हम यहां सेक्योरिटी के लिए करते हैं पर वो बॉडीस के तरकत सो इतना अथ्याचार किया कि बांगलादेशी चाहे वो हिंदु मुस्लिम हो एक तो पहले 10 मिलियन के करीब इंडि उनका बहुत बड़ा रोल था कि भाई बहुत हो गया अब पाकिस्तान आर्मी को हम और नहीं सैहन कर सकते तो उन्होंने स्ट्रगल की काफी Speaker 2 (13:31) मगर ये किताब जो दुनिया के बारे में है ये बस्तर से शुरू क्यों हुई Speaker 1 (13:37) देखे मेरी आदत है सुबे उठके चाय पीता हूँ सभ आजकल वैसे अख़बारें बहुत जल्दी पढ़ी जाती हैं इंडियन एक्सप्रेस में किसी ने लिखा था एक कॉलम और शुरुवात उसने इधर सही की थी और सडल्ली मेरी जो नीम थी उड़ गई और दुबारा मैंने पढ़ा मुझको यह लगा कि देखो कितना जबर्दस Speaker 1 (14:20) कि अपने अपने ये जो बस्तर के गाउं थे हर एक गाउं वाले जो थे वो अपने अपने बगवान को मानते थे मूर्ती पूजा करते थे तो साल में एक दिन होता था जब हर गाउं अपनी अपनी मूर्ती लेके जाता था एक मंदिर में जो सेंटरल मंदिर है और वहाँ जाके वो डिसाइड करते थे, बाई कंसेंसस, कि ये भगवान ने हमारी जो उमीदें थी, उसके उपर खरे उतरे या नहीं उतरे, जो नहीं उतरे, उनको वो डंप कर देते थे, पिछवाडे में, मंदिर के पिछवाडे में, बंगाराम देवी जिसको कहा थी, और � Speaker 1 (15:10) तो मतलब it was a democratic way जिसमें आप assess कर रहे हैं जिसको आप भगवान मानते हैं, लीडर मानते हैं, उसकी performance को और mid term में आप यह भी assess कर रहे हैं कि उसको अब रहना चाहिए या नहीं रहना चाहिए। नेता के तरह भगवान मदल दिये। तो वही सोच के मैंने कहा कि यह हम दुनिया म Speaker 1 (15:37) तो फिर मेरे को लगा कि चलो युनाइट नेशन्स में चल पड़ते हैं और वहाँ एक ऐसा एन्वाल या दो साल के बाद ऐसा कुछ करें सिस्टम पर जैसे हमारी दुनिया है उसमें ये संभवनी मांजूर नहीं है सर Speaker 2 (15:55) अभी ना हम बढ़ाको नेतिन में भी वर्ल्ड अफेयर्स ताकि सिलसलेवा ढंग से उन देशों पर बात हो सके जो 20 और 21 सदी में सामराज जिरहे बड़े ताकत रही सूपर पार रही एक बात पर सब सहमत है कि अमरीका ने 1945 के बाद दुनिया चलाई आपकी किताब में भी यह बात है How Nations Fail and the Unmaking of America's World 45 के बाद जो कुछ घट रहा है उसमें एक तरफ आप भी कह रहे हैं कि अमरिका और पश्चिम का पतन तै है, डिक्लाइनिंग है, दूसरी तरफ आप ये भी लिखते हैं कि अमरिका के पतन के खबरें बढ़ा चड़ा कर बताई जा रही हैं, ये दोनों लाइन एक दूसरी की विरोधा भासी नहीं है? Speaker 1 (16:59) सुबह होते ही डिक्लाइन नहीं हो जाती एवरेज है कि 200 साल लग जाते हैं तो अमेरिका का डिक्लाइन शुरू हुआ है उसमें कोई शक नहीं है अदरवाइस 40 ट्रिलियन डॉलर की डट जो है वो उनकी जीडीपी से ज़ैदा है जीडीपी 39 ट्रिलियन है और जो एकॉनमिस्ट हैं दुनिया के वो यही कह रहे है कि जै ट्रिलियन डॉलर के इंट्रस पेमेंट एन्वली होंगी Speaker 2 (17:31) और Speaker 1 (17:33) ट्रांप ने जो सत्यनास किया है अमेरिका का भी और दुनिया का भी उसका एफेक्ट रहेगा चाहे उसके बाद जितना मरजी अच्छा प्रेसिडेंट आ जाए पर उसको वाइट वाश करने के लिए उसको टाइम � Speaker 1 (17:50) पर फिर भी एक जो मिर्को आशा नजर आती है, जो मैंने किताब में भी reflect की है, कि Americans में, Speaker 3 (17:57) देखे, Speaker 1 (17:58) Trump और Americans में फरक है, कि ठीक है, कई लोग यह भी कहते हैं, कि अनपड हैं, काफी वहां school के बाद जाते भी नहीं हैं, और यह वो, पर जो हैं, पढ़ते हैं, और जो काबिल हैं, उनकी संख्या बहुत जाएदा है तभी आर्टिफिशल इंटेलिजियंस में कहां से कहां पहुंच गया है उनकी जो रिसिलियंस है उनकी जो इच्छा शक्ती है वो अमेरिका को स्टेबल कर सकती है यह भी मैंने किताब में लिखा पर अगर ट्रम्प जैसा दूसरा कोई आ गया Speaker 2 (18:44) सर जॉन गलब है जिनोंने थेरी दी थी कि भाई सामराज याम तोर पर 250 साल चलते हैं अभी अमरिका ने 250 विवर्षकांठ मनाई अपनी 4 जुलाई को अपनी आजादी की अपने बनने की इस हिसाब से तो अमरिका का समय पुरा हो गया लेकिन गलब साहब तो तिहासकार भी नही आप भरोसा करते हैं इस थेरी पर कि 250-300 साल तक कोई सामराजी रहता है जबकि इतिहास में सामराजी रहे हैं जिनने लंबा समय भी पुरा किया है Speaker 1 (19:12) एवरेज की बात है और मैंने वो किताम में अपनी किताम में भी लिखा है 250 साल का देखिये इसमें कोई शक नहीं है कि 1945 के बाद � Speaker 1 (19:35) और उसके बाद कई थिवरियां आनी शुरू हो गई एक फेमस थिवरी यह थी कि एंड ओफ हिस्ट्री कि अब अमेरिका का जो लिबरिलिजम है कैपिटलिजम है वही सब होगा और कुछ नहीं रहेगा दुनिया में सिर्फ यही दो थिवरी रहेगी दूनों थिवरी अब कूड Speaker 1 (19:53) तो अमेरिका को वेटनाम तो खैर पहले ही हो चुका था फिर उसके बाद अफगानिस्तान इराक हुआ और अब इरान हुआ तो सुपर पाहर तो कभी हार मानता नहीं है ना तो इसको तो मूखी खानी पड़ी है जहां भी इसने लड़ाई की है चाहे वो तालिबान के अगेंस् Speaker 1 (20:18) ये एक physical defeat नहीं है ये psychological defeat है दुनिया की opinion में इसको एक चोट पहुंची है Speaker 2 (20:28) देखे Speaker 1 (20:30) वेतनाम के टाइम में सोशल मीडिया नहीं था इंटरनेट नहीं था तो कुछ लोग जो पढ़ते थे उनको पता लगा था कि वेतनाम में इनकी हार हुई है अब जो है हर मिनट पे पता लग रहा है कि इनकी कैसी दुर्गती हुई है चाहे � Speaker 1 (20:54) प्रोपेगंडा के बेसिस पे अमेरिकन्स को कंजुन्स करने की कोशिश कर रहा है कि हमने हॉर्मोस भी ले लिया और ये भी ले लिया और वो भी ले लिया पर अगर आप टिमबक टू में किसी लड़के या लड़की से पूछे हैं वो कहेंगे अच्छे मार पड़ी Speaker 3 (21:08) है Speaker 1 (21:11) जो ट्रम्प ने किया है पिछले डेट साल में वो जो पहले था कि नहीं अमेरिका डिकलाइन नहीं कर सकता वो फीलिंग अब लोगों में आने शुरू हो गई है कि डिकलाइन करने की तरफ अमेरिका बढ़ चुका है Speaker 2 (21:27) ठीक है सर तो यहीं पर यह सवाल पूछता हूँ ऐसे तो ब तो आपको क्या लगता है, इसके कारण क्या है, क्यों फेल हो रहा है? Speaker 1 (21:45) इसके कारण जैसे मैंने पहले ही बताया है कि सबसे बड़ा कारण होता है कि लीडर और उसकी पॉलिसीज. ट्रम्स से पहले बाइडन थे, बाइडन अल्मोस्ट नॉन एक्जिस्टेंट लीडर थे, उनके � Speaker 1 (22:09) तो इतना बड़ा देश आप कैसे चला सकते Speaker 2 (22:12) हैं? Speaker 1 (22:14) बाइडन से पहले कुछ और लीडर्स थे जो मतलब वो नोट फुली इन कंट्रोल वो नोट एसर्टिव लाइक कैनेडी लेस्ट से और इवन क्लिंटन Speaker 2 (22:24) और ओबामा बुश क्लिंटन पर आप Speaker 1 (22:28) इनने अच्छा नेदा नहीं मान रहे हैं किनको बुश का मिक्स्ट उपिनियन है पर क Speaker 1 (22:41) बुश सीनियर बुश जूनियर ने कोई हाम नहीं किया पर मैं ये नहीं कहूँगा कि वो एक बहुत पहुंचे हुए लीडर थे जिन्होंने कोई transformation की होगी अब बाइडन के चार साल बुश के छे साल दस साल अगर एक किसी institution को आप घायल करते रहें चोट मारते रहें तो institution में खून बहना शुरू हो जाएगा ना चाहे वो company हो या कोई family undertaking हो या कोई देश हो और बाइडन और ट्रंप ने मिलके जो देश की हालत की है वो दर्दनाक है especially Speaker 1 (23:22) स्टार्टिंग फर्म डे वन उसको सिर्फ फैमिली के लावा कुछ और सूचता ही नहीं है कि किस तरह मैं इसको बिलियन से ट्रिलियन बनाओ सिर्फ Speaker 2 (23:31) इन Speaker 1 (23:31) दस साल में Speaker 2 (23:33) अमरिका कितने लगा? Speaker 1 (23:34) देखे 10 साल में नहीं, एक साल में यह चीज हो जाती है, अगर आप again empires की बात करें, जिनका मैंने full description दी है, तो एक बार जब आप नीचे, पहाडी के नीचे से उतरना शुरू करें, फिर उपर चड़ना बहुत मुश्किल होता है, escalator में उपर जा सकते है Speaker 1 (24:02) एक साल में ही अगर राजा जो है या आजकल के प्रेसिडेंट या प्राइम मिनिस्टर कह ले ऐसी पॉलिसीज करें जो जन कनलियान के लिए नहीं है और जो अपने साथियों के लिए ही है तो उस देश का भला विनाशकाले विपरियत बुद्धी Speaker 2 (24:32) जो चेक एं बेलेंस पर चले हैं अमरीका ने तो एक संस्थान मनाए है आपकी किताब भी कहती है कि संस्थानों का होना बहुत जरूरी है हिंदुस्तान पर जब बात करूँगा तब इनकी फिर से बात आएगी संस्थानों की इतने बड़े संस्थान इतने मजबूत संस्थान क्या बस वो इतनी मजबूत थे कि एक दशक में दो प्रेसिडेंट ऐसे आए जिनोंने अपने