1972 की घटना - Horror Stories in Hindi
Horror Stories in Hindi
This episode of Horror Stories in Hindi features four distinct, spine-chilling accounts shared by listeners. The narratives range from child
Key takeaways
- Minakshi recounts childhood memories of seeing large, frightening figures near a river that may have been powerful Jinns.
- Prakash describes an investigation into an abandoned mansion where he discovered human remains and heard mysterious clapping sounds.
Main topics
- River spirits and Jinns
- Abandoned haunted mansions
Notable quotes
क्या पता वो लोग तुझे जान से मार दे
Conclusion
A gripping collection of listener-submitted tales that explore the ter
Transcript preview
Speaker 1 (0:05) Horror Stories in Hindi में आप सभी का स्वागत हैं दोस्तों अगर आप लोग इस चैनल पर नए हो तो इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए जाकर हमारी दुसरी कहानिया जरूर सुने और देखे आप लोगों को बहुत मज़ाएगा साथ इसाथ डिस्क्रिप्शन बॉक्स में हमारा वाटस� Speaker 1 (0:32) चलिए शिरू करते हैं हमारी आज की कहानियां दोस्तों हमारी ये पहली कहानी मिनाक्षी की है इन्होंने पहले भी हमारे चैनल के साथ दो कहानियां शेयर कर रखी है चलिए अब बढ़ते हैं इनकी कहानी की ओर मेरा नाम मिनाक्षी है आज जो घटना मैं आप लोगों को बतान लगभग पाँच साल की रही हुँगी, आज मेरी उम्र 48 येर्स की है। अब घटना पर आती हूँ, मेरे दादा जी बताते है कि उस समय उनकी उम्र बहुत जादा छोटी थी, वो घर पे अपना जादातर समय खेलने कुदने में ही बिताते थे, और जो बाकी का समय होता था, व अगर बहुत से बहुत भी जादा घर पकड़े जाए तो शायद मुश्किल से पचास घर गाउ में होंगे छोटे बड़े बच्चे सब मिला के सरिफ तीन सो ही लोग के आसपास महापर रहते थे मेरे दादा जी बताता है कि एक शाम में हम लोग जब काम करके अपने घर लोट � Speaker 1 (1:56) मैंने कहा कि पिताजी मैं जाता हूँ तो इसमें तुम्हें डरने की क्या बात है। पिताजी कहने लगे कि मैंने सुना है वहाँ पर चोर डाकू लोग आते हैं। जिसके बाद मैं हसते वे पिताजी से कहने लगा कि आप बिलकुल चिंता ना करें। मेरे साथ मेरे और भी दोस् कहीं मुझे समझ में आ रहा था कि बात कुछ और है लेकिन मेरे पिताजी मुझसे जूट बोल कर बस अपनी बात को मनवाना चाते थे कि कैसे भी मेरा उस नदी के किनारे जाना रूप जाया है अलेकि उस नदी को लग कर भी काफी सारी खेत थी और दुसरी साइट बड़ा सा च और कुछ तो यू भी कहते थे कि महाँ पर भूत प्रेत है। मुझे तो भूत प्रेत का फिर भी कहीं ठीक लगता था। लेकिन चोर डाकू से हमें इतना डर नहीं लगता था। मैंने कुछ दिन के बाद एक शाम अपने दोस्तों को बताया कि मेरे पिताजी मुझे वहाँ जान मेरे पिताजी अक्सर कहते है क्या पता वो लोग तुझे जान से मना मार दे। मैंने उसके बाद उन लोगों से ये भी कहा कि हमारे पास लूटने के लिए तो ऐसा कुछ भी नहीं है कि जो चोर डाको हमसे ले सके लेकिन फिर भी जान का खतरा है। तबी ही उन में से मेरा एक द आत्माय रहती है जो बड़ी ही शक्तिशाली है और वो कई बार लोगों को कच्चा चबा कर खा जाती है। मैंने कहा कि इंसानों को आत्माय खा जाती है। वो कहने लगा कि पता नहीं कुछ तो ऐसे भी कहते है कि वहाँ पर इतनी जादा बुरी आत्माय रहती है कि अगर कोई � Speaker 1 (4:19) कि अब बहुत अच्छा हुआ हमने महा जाना छोड़ दिया लेकिन अगले ही पल मैंने कहा कि ये सारी बात तो ठीक है पर जो भी आत्मा है वो तो नदी के दुसरी साइड रहती है न तो वो कहने लगा कि हाँ हमने भी उसी मैदान के बारे में सुना है सुना तो क्योंकि मैंने � Speaker 1 (4:49) कुछ लोगों के मुझे सुना हुआ था खाली, फिर मैंने सुचा कि क्यों ना वहाँ पर जाकर एक बार दूर से ही देखा जाएं और सच्चाई का पता लगाया जाएं, मेरे दोस्तों से जब मैंने ये बात कही तब वो सबी लोग इस पर मान गए, फिर मैंने उन लोगों से कह Speaker 1 (5:16) जितने भी गाओ के रहवासी थे वो अपने अपने बिस्तर पर सोने चले जाते थे हमारा लास्ट टाइम सोने का ही रात के आठ बजे का था तो हम कुछ शाम के चार बजे के आसपास महाप के लिए निकल पड़े जब हम वहाँ पर पहुँचे और पहुँच कर सामने की ओर दे रही बात आत्माओं की तो वो दिन के समय शायद दिखाई नहीं देते हैं या हो सकता है कि हमें नहीं दिखाई दे रहें मेरे दोस्तों ने कहा कि अब जो भी बात होगी हमें बस देखना था अब चलो देख लिये निकलते हैं मैंने मेरे दोस्त का हाथ पकड़ते हुए कहा हमे Speaker 1 (6:08) ऐसे ही वहाँ पर वेट करते करते तब सूरच डूबने को आ गया हमें पता ही नहीं चला अब सूरच पूरी तरा ढल चुका था और हम अब भी वहीं खड़े थे ये इंतिजार में कि क्या पता कोई आत्मा या चुड़ेल दिख जाए कुछी समय के बाद हमें उसी मैदान में क Speaker 1 (6:36) कुछ कर रहे हैं जो के दूरी से दिखाई नहीं दे रहा है उसके बाद हमने देखा कि वो लोगों ने पता नहीं कहां से अचानक से आग उठा कर लेकर आ गई और वो आग धीरे धीरे बढ़ते जा रही थी वो चारो पाँचो लोग उस आग के आसपास चक्कर लगा रहे थे � Speaker 1 (7:03) फिर हमने देखा कि वो लोगों का जो साया था याने reflection जो जमीन पर पढ़ रहा था वो काफी जादा बड़ा था वो वैसे तो दूर से छोटे ही दिखाई दे रहे थे लेकिन आग की वज़े से उनका reflection और जादा बड़ा और भयानक दिख रहा था हम सब खड़े होकर देख ही � Speaker 1 (7:32) पत्थर की आवाज उनके कानों तक बिलकुल चले गई। जिसके बाद एकदम से चलते चलते वो लोग रुख गए और हमारी ओर देखने लगे। उनमें से आग की रोशनी में हमने एक की शकल देखें जो काफी जादा बड़ी और घुंगराले बालों से धखी हुई थी। उस बेहद ही खतरनाक और डरावने लग रहे थे फिर वो तो वहीं खड़े हो गए लेकिन उन में से एक आदमी या क्या पता वो आत्मा थी आगे बढ़ने लगी और वो नदी के दुसरे किनारे आकर रुक गई जब हमने उस आदमी को हमारी ओर आता देखा तब हम काफी पीछे त खड़े होकर हमें बस घूरे जा रहा था, शायद वो बहुत जादा गुस्से में था, और हमें वो मारना चाता था, मैंने तुरंत ही मेरे दोस्ते कहा, यार तुने ये पत्थर मार कर अच्छा नहीं किया, हम यहाँ पर अभी फ़स जाएंगे, वो कहने लगा, चलो जल्दी घ तो हम जल्दी जल्दी अपने घर की ओर भागने लगे, और हम भागकर अपने घर पर आ गए, मैं तो बहुत ज़ादा घबराय हुआ था, मैंने ये बात किसी को नहीं बताई, अगले दिन सुबा में हमारे वहाँ पर एक आदमी था, जो के हमारे घर के भैसो का दूद निकालत Speaker 1 (9:28) कि वो प्रेत आत्माए थी। मैंने कहा कि प्रेत आत्माए तो आग से डरती है न। वो कहने लगा कि तुझे किसने बताया। तब मैंने कहा कि मेरे पिताजी के मुझे मैंने ये बात कई बार सुनी है। वो मेरी और दुबारा देखा और कहने लगा क्या भरोसा वो जिन भी हो स Speaker 1 (9:56) कुछ इतने खतरनाक होते हैं कि इंसानों कोई जान ले लेते हैं फिर वो ये भी कहने लगा कि जिन मास भी खाते हैं कहीं ना कहीं अब